पिता (Father)


 पिता
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पिता, पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता, पिता सृष्टि में निर्माण की अभिव्यक्ति है,

पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,

पिता, पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता, पिता धौंस से चलना वाला प्रेम का प्रशासन है,

पिता, पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,
पिता, पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,

पिता, पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,

पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,

पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति है,

पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है,
पिता, पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ति है,

पिता, पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता, पिता दुनिया दिखाने का अहसान है,

पिता, पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,

क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशिषों को काट नहीं सकता,

विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,

विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,

वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं।

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पिता से

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वक्त के साथ वृद्ध होते पिता,
तुम्हें देखकर,
सभी घड़ियाँ तोड़ने का मन करता है,
ये जो छोटी मुश्किलें
तुम्हारे बड़े जीवट को पस्त करने लगी हैं,
अपने सब सपनों में
तुम्हारी उम्र सहेजने का मन करता है,
अब बहुत से काम मैं कर सकता हूं,
जो तुम नहीं कर पाते,
तो ये सारी कामयाबी फेंकने का मन करता है,
देर से लौटने पर अब
तुम क्यों नहीं पूछते देरी का कारण,
तुम्हें बहुत से जवाब देने का मन करता है,
तुम्हीं मेरे नायक हो
और सफलताओं के सर्वोच्च प्रतिरूप,
नहीं अच्छा लगता अपने पैर में तुम्हारे जूते पहनना,
तुम्हें वही हिम्मती जवान देखने का मन करता है,
चश्मे के पीछे से झाँकती,
तुम्हारी सिकुड़ी मगर खूबसूरत आँखें,
अख़बार पढ़ती हुई नहीं,
ख़्वाब देखती हुई अच्छी लगती हैं,
एक प्यारी सी शर्त लगाएँ आओ फिर,
सब शर्तों में तुमसे हारने का मन करता है,
तुमसे छिपकर अब कुछ बातें
आहिस्ता होती हैं,
घर में अब कुछ हंसी ठहाके
आहिस्ता होते हैं,
आओ मिलकर हँसें, खेलें खेल पुराने,
हँसते हँसते तुम्हारी गोदी में सिर रखकर,
घंटों रोने का मन करता है,
हर एक कहानी झूठी है,
सब दादी नानी झूठी हैं,
सच वो है बस,
जो तुम बोलो और मैं सुन लूं,
एक नई कहानी सुनते सुनते
हर रात तुम्हारे पाँव दबाने का मन करता है,
तुम्हारी चुप्पी का यह हर क्षण
एक एक युग से भी लम्बा है,
पुरानी डायरी को खोलो अब,
कुछ गीत तुम्हारे सुनने का मन करता है,
तुम चुके नहीं हो,
बस रुक गए हो,
तुम ढले नहीं हो,
बस थक गए हो,
तुम जागो तो सवेरा हो,
तुम सो जाओ तो अँधेरा हो,
तुममें अब भी शक्ति है,
जीतने की, उड़ने की,
तुममें अब भी शक्ति है,
आसमान रचने की,
कभी घूमने का मन करे तो बताना,
तुम्हारे साथ पैदल
चाँद तक चलने का मन करता है।
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