मां (MAA)


मां

मां संवेदना है, भावना है, अहसास है मां
मां जीवन के फूलों में खुशबू का वास है मां

मां लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है मां
मां पूजा की थाळी, मंत्रो का जाप है मां

मां आंखो का सिसक्ता हुआ किनारा है मां
मां गालों पर पप्पी है, ममता कि धारा है मां

मां झुलसते दिनो में कोयल की बोली है मां
मां मेहंदी है, कुमकुम है, सिंदूर की रोली है मां

मां कलम है, दवात है, स्याही है मां
मां परमात्मा की स्वयं एक गावही है मां

मां त्याग है, तपस्या है, सेवा है मां
मां फूंक से ठंडा किया हुआ कालेवा है मां

मां प्रथ्वी है, जगत है, धूरी है
मां के बिना इस दुनिया की कल्पना अधुरी है,

में ये पंक्तीया मां के नाम करता हू
में दुनिया की सब माताओ को प्रणाम करता हू!!

MAA

मैने तो जब देखा अम्मा आँखें खोले होती है
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है

बँटवारे की खट्टी मीठी कड़वी सी कुछ यादें हैं
छूटा था जो घर आँगन उस पर बस अटकी साँसें हैं
आँखों में मोती है उतरा पर चुपके से रोती है
जाने किस पल जगती है वो जाने किस पल सोती है

तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फलक
मुझको अपनी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी।

लबों के उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती।

मुझे बस इसलिए अच्छी बहार लगती है
कि ये भी माँ की तरह खुशगवार लगती है।

बुलंदियों का बड़े से बड़ा निशान छुआ
उठाया गोद में माँ ने तो आसमान छुआ।

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है

माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

ये ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सजदे में रहती है।

यारों को खुशी मेरी दौलत पे है लेकिन
इक माँ है जो बस मेरी खुशी देख के खुश है।

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

किसी को घर मिला हिस्से में , या कोई दूकान आई
मई घर में सबसे छोटा था , मेरे हिस्से में माँ आई।

सख्त राहों में भी आसान सफ़र लगता हे
यह मेरी माँ की दुआओं का असर लगता हे।

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Is tarah mere gunaahon ko wo dho deti hai,
maa bahut gusse mein hoti hai to ro deti hai

Maine rote hue ponchhe the kisi din aansoo
muddaton maa ne nahi dhoya dupatta apna

Abhi zinda hai maa meri mujhe kuchh bhi nahi hoga,
main jab ghar se nikalta hoon dua bhi saath chalti hai

jab bhi kashti meri sailaab mein aa jaati hai
maa dua karti hui khwaab mein aa jaati hai

aye andhere dekh le munh tera kaala ho gaya,
maa ne aankhein khol di ghar mein ujaala ho gaya

meri khwaahish hai ki main phir se farishta ho jaun
maaN se is tarah liptun ki bachcha ho jaun

maa ke aage yun kabhi khulkar nahi rona
jahan buniyaad ho itni nami achhhi nahi hoti

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“Love u MAA”

Besan ki saundhi roti par
khattii chatni jaisi Maa
yaad aati hai chaukaa-baasan
chimataa phukni jaisi Maa

baans ki khurrii khaat ke uupar
har aahat par kaan dhare
aadhi soii aadhii jaagi
thaki dopahari jaisi Maa

chirdiyon ke chahkaar mein gunje
kabhi Muhammad kabhi Ali
murge ki aavaaz se khultii
ghar ki kundi jaisi Maa

bivii, beti, bahan, padosan
thordi thordi si sab mein
din bhar ik rassii ke uupar
chalti nathani jaisi Maa

baant ke apana cheharaa, maathaa,
aankhein jaane kahaan gai
phate puuraane ik albam mein
chanchal ladki jaisi Maa

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5 thoughts on “मां (MAA)”

  1. meenash gautam said:

    realy so sweet poem

  2. superb….i really like it…. and missing my mom…
    my mom is my best friend…. :)

  3. dats very nice yaar

    i wish ki har koi apni maa ko itna he sammmaan aur pyar kare

    thans a lot dude for being so nice

  4. sarvesh said:

    i have no words it mind mind to explain it……

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